इंतजार--फिर से ढले वही शाम, फिर से निकले वही सूरज
फिर से निकले वही सूरज, फिर से ढले वही शाम
- रोशनलाल की जलेबी व देवा की कचौड़ी का है इंतजार...
- लॉकडाउन खुले तो मिले कुछ हद तक बंदिशों से राहत
कासगंज। वह सुबह जो नदरई गेट पर रोशनलाल की जलेबी व गांधी मूर्ति पर देवा व जैन की कचौड़ी से शुरू होती थी। शाम गांधी मूर्ति के पास गोल गप्पे, भेलपुरी व अन्य चाटकर के साथ ढलती थी। उस पर कोरोना काल की ऐसी नजर लगी कि उसने २४ मार्च की रात से इन सभी की कढ़ाई उतरवा दी। रविवार को कोरोना काल को एक माह तीन दिन हो गए। अब लॉकडाउन के दूसरे चरण के निर्धारित समय में भी सिर्फ सात दिन का समय शेष है। लोगों को उम्मीद है कि शायद उन्हें आने वाले समय में इस कोरोना काल में कुछ राहत जरूर मिलेगी। यदि लॉकडाउन बढ़ेगा भी तो सरकार ठप्प पड़े व्यापारिक पहिए को चलाने को कुछ सकारात्मक कोशिश जरूर दिखाएगी। हांलाकि सबकुछ पहले की तरह तो इतनी जल्दी सामान्य नहीं होने वाला लेकिन फिर भी कहावत है न कि उम्मीद पर दुनिया कायम है।
इस एक माह तीन दिन के समय में लोगों ने जो संयम का परिचय दिया वह भी काबिले तारीफ है। इस पर भी गौर करना होगा कि जनपद के पड़ोसी जिले अलीगढ़ में रविवार तक आठ से अधिक व बदायूं, एटा समेत अन्य जिलों में दो से तीन कोरोना पॉजिटिव केस हैं। यह सुखद है कि कासगंज जनपद में तीन केस मिलने के बाद कोरोना की रफ्तार पर ब्रेक है और इन पॉजिटिव लोगों की दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आई है। प्रशासन व जनपदवासियों को इंतजार है कि यदि इनकी शेष रिपोर्ट भी निगेटिव आए तो जनपद कोरोना मुक्त घोषित हो जाए। कोरोना काल में लोगों के इस धैर्य व संयम में पर्दें के पीछे के उन अज्ञात यौद्वाओं का भी साधुवाद जो अपने कर्तव्य को निष्ठा से निभा रहे हैं। कासगंज कोरानाकाल के इतिहास में यह भी दर्ज होगा कि पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि राजवीर साहू की रसोई भी रोजाना सैकड़ों लोगों को पेट भरती रही और यह नेक कार्य अविरल चल रहा है। अब लोगों को इंतजार है फिर से वही सूरज निकलने व शाम ढलने का।
लोगों को उम्मीद है कि यदि लॉकडाउन आगे भी बढ़े तो उन्हें कुछ शर्तों के साथ थोड़ी राहत मिल सके जिससे बेपटरी हुई घरेलू अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास किए जा सकें। लोगों को यह भी ध्यान रखना होगा कि तीन मई के बाद यदि लॉकडाउन खुलता है तो लोगों को स्वयं अनुशासन दिखाना होगा, क्योंकि कोरोना से मुक्ति का अभी तक यही उपाय विश्व भर ने खोजा है। जो ज्यादा साफ-सफाई व सामाजिक दूरी का अनुपालन करेगा वह इस कोरोना से उतना अधिक सुरक्षित रहेगा।
आकाशदीप भारद्वाज, स्वतंत्र पत्रकार
उम्मीद पर दुनिया कायम है और उम्मीद यही है की लोग 3 मई के बाद यदि लॉकडाऊन खुला तो भी उसका पालन करेंगे । मुझे अपका यह लेख व्यक्तिगत रूप से बहुत अच्छा लगा ।
ReplyDeleteबहुत खूब मेरे भाई
Deleteबहुत बहुत आभार आपका।����
Deleteदहलीज़ एक मर्यादा👍👍👍💐💐
ReplyDeleteलॉकडाउन का अलग पहलू👌👌
ReplyDeleteBahut Badhiya akash
ReplyDeleteHindi hai hum watan h
ReplyDeleteKalpana
बहुत बहुत धन्यवाद आप सभी का।
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