जब हथियार नहीं तो रास्ते और भी हैं.... समूचा विश्व आज कोरोना वायरस के अभूर्तपूर्व संकट से गुजर रहा है। विपदा ऐसी है कि शक्तिशाली से लेकर आम जनमानस भी इस अदृश्य असुर की शक्ति से नहीं बच पा रहा है, यह असुर पूरे विश्व को निगलने को आतुर है। फिलहाल तो इस असुर का खात्मा भी नहीं किया जा सकता है। सवाल है कि फिर इस असुरी शक्ति से कैसे पार पाया जाए। इसकी राह हमारे धर्मग्रंथों ने हमें दिखाई है। श्रीमदृभागवत में एक प्रसंग है कि मगध नरेश जरासंघ ने 18वीं बार अपने साथ एक अज्ञात योद्वा कालयवन को लेकर चढ़ाई कर दी।युद्व के दौरान जब भगवान श्रीकृष्ण को यह ज्ञात हुआ कि इस योद्वा को अस्त्र- शस्त्र से नहीं हरा सकते तो वह एक विशेष दिशा की ओर भागे। कालयवन भी उनके पीछे दौड़ा। भागते हुए श्रीकृष्ण एक गुफा में घुस गए। गुफा में पहले से सोते हुए व्यक्ति पर उन्होंने अपना पीतांबर डाल दिया। कालयवन ने उसे श्रीकृष्ण समझकर उनके ऊपर प्रहार किया। सोते हुए व्यक्ति की निद्रा टूटी और कालयवन भी श्राप के कारण भस्म हो गया। उक्त घटना को यदि वर्तमान परिपेक्ष्य में शामिल करें तो यहीं संदेश है कि कोरोना नामक इस महामारी के सामने...