मन जब तमाम आशंकाओं से घिरा हो तो घर का रास्ता ही दिखता है.....।

मन जब तमाम आशंकाओं से घिरा हो तो घर का रास्ता ही दिखता है.....।
                चाय विस्कीट के सहारे कट रहे दिन।
कासगंज। मन जब तमाम आंशकाओं से घिरा हो तो शांति के लिए सिर्फ घर का ही रास्ता दिखता है, क्योंकि वहां उसे अपनों के बीच खाने-पीने और रहने का डर नहीं है। कोरोना काल में मजदूरों के मन में भविष्य की तमाम आंशकाओं के कारण वह एक माह के बाद भी पलायन को मजबूर है। केंद्र व राज्य सरकार के सुविधाओं के तमाम दावे भी इन मजदूरों के कदम नहीं रोक पा रहे।शनिवार को नदरई गेट पर पुलिस ने गुजरात से आए तीन मजदूरों को रोका और उनकी मेडीकल जांच कराई। यह मजदूर १२00किलोमीटर का सफर तय कर आए थे और अभी उन्हें २०० किलोमीटर का सफर और तय करना था। शुक्रवार को भी आधा दर्जन मजदूर रेलवे पटरी के किनारे पुलिस ने रोके थे। यह मजदूर पानी व बिस्किट के सहारे ही हजारो किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं। 
 शनिवार को तड़के सुबह वीरपाल, अजयपाल, विजेंद्र निवासी नीमापुर हरदोई को नदरई गेट पुलिस चौकी द्वारा पूछताछ के लिए रोका गया। भूख व थकान की बेबसी उनके चेहरे पर देख पुलिस ने चौकी में पहले से मौजूद केले उन्हें खाने को दिए। मजदूरों ने बताया कि वह १२०० किलोमीटर दूर गुजरात में एक पीतल की फैक्ट्री में ठेके पर कार्य कर रहे थे। लॉकडाउन के बाद से ही ठेकेदार ने फोन उठाना बंद कर दिया। अब कुछ दिन तो गुजारा कर लिया लेकिन खाने के अब लाने पड़ रहे हैं। ऐसे में १८ अप्रैल को घर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं सूझा। अब कासगंज से हरदोई करीब २०० किलोमीटर दूर है। 

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