अंग्रेजी के मोहपाश से मुक्ति का समय आजादी का अमृत महोत्सव देश में कई बदलाव का साक्षी रहेगा। भारत को औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति मिल रही है। बदलाव में हमने देखा कि राजपथ की जगह हम जल्द ही कर्तव्य पथ और भारतीय नौसेना के झंडे पर क्रास के स्थान पर अब नेवी का क्रिस्ट है। यह बदलाव हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल ही में लाल किले की प्राचीर से दिए गए उस पंच प्रण संबोधन की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने हमें गुलामी की मानसिकता से शत-प्रतिशत मुक्ति का संकल्प लेकर आगे बढ़ने को कहा। यही सही समय है कि हमें अब अंग्रेजी के मोहपाश से भी मुक्त हो जाना चाहिए। सरकार को अब निश्चित ही संसद में कोई कानूनी बाध्यता कर हिंदी को अनिवार्य रूप से कामकाज में शामिल करना चाहिए। धारा 3(3) के तहत कई दस्तावेज व राजभाषा नियम 1976 के तहत हिंदी में कार्य करने के लिए कई बाध्यताएं हैं लेकिन इन बाध्यताओं के वाबजूद हिंदी के प्रयोग में सफलता का प्रतिशत कितना है यह हिंदी और राजभाषा की सेवा करने वाले किसी भी व्यक्ति से छिपा नहीं है। भारत में अनेक समृद्ध भाषाएं हैं, लेकिन विदेशी अंग्रेजी की ठस...