आजाद भारत ने न कभी ऐसा देखा न सुना....
इस बार आजादी की 74वीं शाम उतनी खुशहाली भरकर
नहीं लाई। लालकिले की प्राचीन से विश्व के सबसे मजबूत लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के
संबोधन में भी ऐसा कुछ खास नहीं था जो जनता को सीधे राहत देने वाला हो। कोरोना के साये
में मना आजादी का यह जश्न फीका ही रहा और स्मरीय भी। आजाद भारत में इस वर्ष वह सब
हुआ और वह सब लोगों ने देखा जो पहले कभी न ही देखा और न सुना। गत वर्ष हजारों रोजगार
थे तो इस वर्ष लाखों बेरोजगार हैं। 24
मार्च को कोराना की लड़ाई को 21
दिन में जीतने का प्रण लेने वाले अब खामोश हैं, केंद्र सरकार ने हाथ खड़े कर लिए हैं वहीं राज्य
सरकारें कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बेबस दिखाई दे रही हैं।
रविवार देर रात नौ
बजे तक देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2589682 हो चुकी है। देश
में अभी कोरोना के 677444
एक्टिव केस हैं जबकि इलाज के बाद 1862258 को अस्पतालों से
डिस्चार्ज किया जा चुका है। जानलेवा वायरस की चपेट में आने से अब तक 49980
कोरोना मरीज जान गंवा चुके हैं. भारतीय
आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार 15 अगस्त को कोरोना
के 7,46,608 सैंपल
जांचे गए। अबतक कुल 2,93,09,703 सैंपल
का टेस्ट हो चुका है। स्थिति कब तक सामान्य होगी कहना मुश्किल है।
सरकार भले ही आंकड़े
के खेल में उलझी हो लेकिन आम आदमी को तो बस अपने आसपास बढ़ रहे केसों से ही कोरोना
की भयाभयता का अंदाजा लग जाता है। 15 अगस्त को कोरोना की बढ़ती रफ्तार अपने 140वें
दिन में प्रवेश कर चुकी है। देश के सभी प्रदेश कोरोना के खिलाफ जंग में डटे हुए है, लेकिन यह ग्राफ कहीं
भी संतोषजनक स्थिति में नहीं आ रहा,
बढ़ते संक्रमण को लेकर सभी राज्यों की अपनी-अपनी चिंताएं
हैं, ऐसे
में मध्यप्रदेश, राजस्थान
व बिहार में चल रहे राजनीतिक समीकरणों ने सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों की चिंताएं बढ़ा
रही हैं। सत्ता पक्ष व विपक्ष कुर्सी के लिए कोरोना के किसी भी स्तर के संकट को भी
उठाने को तैयार है। जनता के पास तो अभी फिलहाल दो गज की दूरी व मास्क ही इस भयावह
बीमारी से बचने का उपाय है। चूंकि भारत में अभी तक वैक्सीन का ट्रायल ही पूरा नहीं
हुआ है। दूसरे व तीसरे चरण का ट्रायल होना बाकी है।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी
एस्ट्रा जेनेका कोविड-1919 की वैक्सीन कोवीशील्ड के दूसरे व तीसरे चरण के ट्रायल
की अनुमति दी गई है। दवा कंपनी ने भी दावा किया है कि 2020 तक दोनों चरणों के ट्रायल
पूरे किए जा सकेंगे, लेकिन
वैक्सीन हमें अगले वर्ष ही मिलेगी,
चूंकि तीसरे चरण का ट्रायल मार्च-अप्रैल में हो सकेगा।
ऐसे में अभी सारी उम्मीदें हम बाहरी देशों पर ही टिकाये हैं। बाकी रूस बैक्सीन बनाने
व ट्रायल पूरा करने का दावा कर चुका है,
लेकिन इसकी 15 लाख खुराक बनने में ही एक साल से अधिक
का समय लगेगा। चिंताजनक यह भी है किसी अन्य देश को इसके दूसरे व तीसरे ट्रायल की खबर
नहीं लग पाई, जिससे
इसकी विश्वसनीयता पर प्रसन्नचिन्ह लगा हुआ है। देश में युवाओं की चिंता बेरोजगारी
को लेकर है तो कारोबारियों की चिंता कारोबार को लेकर। दोनों ही परिस्थितियों में 2020
तक कोई राहत मिलती नहीं दिख रही। कोरोना काल में देश में बेरोजगारी 27 फीसदी तक पहुंच
गई। संकटकाल में देशभर में करोड़ों की नौकरियां गईं, जिनकी बचीं उनकी सैलरी कट गई। नौकरी पेशा से
लेकर स्वरोजगार, घरेलू
बाजार तक का बजट कोरोना ने बिगाड़ दिया। देश में सख्त लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियां
थम सी गई हैं। अनलॉक थ्री चरण चल रहा है,
लेकिन आर्थिक गतिविधियों का पहिया अपनी पूरी गति पर
नहीं पहुंचा है। बाजार अभी भी सूनसान है,
बाजार में रौनक नहीं लौटी है। 74वें स्वतंत्रता दिवस
के मौके लोगों को आस है, कि
जल्द से जल्द कोरोना से मुक्ति मिले। 75 वे स्वतंत्रता दिवस की शाम इतनी फीकी न
हो। इस शाम में हर्ष, उल्लास
हो व देश में फिर से रोजगार व अमन चैन लौटे।
आकाशदीप भारद्वाज,
स्वतंत्र
पत्रकार

बहुत सुंदर लेखन,
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