आपके वास्ते मन मे ढेरों शुभकामनाएं लाए हैं।😊

आपके वास्ते मन मे ढेरों शुभकामनाएं लाए हैं।
. सुख की कल्पनाएं है, सृजनात्मक गीत लाए हैं
आपके वास्ते मन में ढेरों शुभकामनाएं हैं
आपकी जिंदगी में न घटे कोई पल ऐसा,
उदासी में जो पल तुमने पिछले दिनों बिताए हैं

हर नई सुबह, हर नया हफ़्ता, हर नया महीना और हर नया साल खुद में नई ऊर्जा, नई उम्मीदों व नई आकांक्षाओं को समेटे हुए गुजरे वक्त के तनावों व अवसादों से मुक्त होकर एक नई उम्मीद व अवसर की शुरूआत लेकर आता है, लेकिन मैं साल 2020। मेरी शुरूआत ही कोराना नामक महामारी से हुई। इंसानी इतिहास का सबसे मुश्किल दौर में शुरू हुआ और मेरे खत्म होने तक भी बाकी है। मेरे कारण ही आपको लॉकडाउन ने घरों में कैद किया। आर्थिक, शारीरिक, स्‍वास्‍थ्‍य आदि चुनौतियों का भी सामना किया। मानता हूं कि मेरे दौर में आई इस बीमारी ने कइयों को संभलने का मौका भी नहीं दिया। कई लोग बेधर हुए तो कइयों के रोजगार गए। कइयों की जान भी गई, आपने यह भी कहा कि ऐसा साल दोबारा न आए। मनहूस साल व अन्य कई बुरे नामों से मुझे पुकारा गया लेकिन क्या वाकई मैं सिर्फ बुराई लेकर आया। चूंकि हर दुखद पहलू के पीछे सुखद पहलू भी छिपा होता लेकिन हमारी निगाह हमेशा नकारात्मक पर ही टिक जाती। सकारात्मक दृष्टिकोण कम ही लोगों में होता। इसलिए मैं आपको अपना सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाने की कोशिश भी कर रहा हूं। जाने-अंजाने में इस कठिन समय में इंसानी जीवन को कई सीख मिली जो इस संकटकाल के बिना शायद ही मिलना संभव होती। पहली बार था जब मानव मूल्य अपनी कसौटियों पर खुद ही कसा गया। इंसानी जीवन के किसी काल में मानव मूल्यों का इतना हिसाब किताब न होता जितना 2020 में हुआ। पूरी दुनिया को जब कोविड का धक्का लगा तो असंख्य मन, समाज, देश छलके, जो बाहर था वह भीतर आ गया। आँख मूंद कर सुख के पीछे भाग रहे लोग भी जागे और ठहरे। उन्हें अहसास हुआ कि जीवन के जिन पलों में वह आनंद की खोज में डूबे थे असल आनंद वह था ही नहीं। ठहर कर जब उन्होंने अपने परिजनों को समय दिया तब पारिवारिक आनंद की अनुभूति हुई। सुकून से लोगों ने घर में समय बिताया। भविष्य को लेकर टूटन थी लेकिन भरोसा था अच्छे समय का। मूक प्राणियों के प्रति भी लोगों की स्नेह व परवाह दिखी, तमाम बंदिशों के बीच लोगों ने ऐसे प्राणियों की भी सुध ली जिन्हें उन्होंने राह चलते कभी दुत्कारा होगा। सन्नाटा, अकेलापन, डर, भूख व नाउम्मीदी से घिरे इंसानों ने अपने दिल को सबके लिए सहानुभूति से भर लिया। महामारी की अजमाइस अब खत्म होने को है, कैलेंडर बदलने का समय नजदीक आ चुका है, एक दशक का पटापेक्ष हो रहा है। वक्त अभी भी ठहरा हुआ है। इसी करवट के इंतजार के साथ शुरू हो रहा है नया साल 2021। रॉबर्ट एच. शुलर का यह कथन उम्मीद जगाता है मुश्किलें हमेशा हारती है, संघर्ष करने वाले हमेशा जीतते हैं। नए साल के स्वागत में लोगों के हौसले बंधे हुए हैं, हर कसौटी पर खरा उतरने की फिर से तैयारी है। उम्मीद है कि लोग इस नूतन वर्ष में इस महामारी से बाहर निकलेंगे और यह बीमारी इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।

Comments

  1. हर सिक्के के दो पहलू होते हैं...नकारात्मकता में भी सकारात्मकता ढूढना ही मानव जीवन का उद्देश्य होना चाहिए।

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    1. जी बिल्कुल, व्यक्ति को हर परिस्थितियों में उम्मीद का दामन पकड़े रहना चाहिए।

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  2. सकारात्मक सोच ही हमारे जीवन को सकारात्मक बनाती है🙏

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