चाय न होती तो कैसा होता जीवन....



सोचता हूं कभी-कभी ये चाय न होती तो कैसा होता जीवन

चाय की दो चुस्कियों के बिना अधूरा सा लगता है जीवन

ये दो चुस्‍की के बिना नीरस होता जीवन का परमानंद ।।  

 

ये चुस्‍की न होती तो क्‍या बन पाते नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री ?

ये चुस्‍की न होती तो क्‍या हो पाती गली-2 चाय पर चर्चा ?

ये चुस्‍की न होती तो क्‍या हो पाते राजनैतिक हित पूरे ?

ये चुस्‍की न होती तो क्‍या रिश्‍ते बन पाते

 

 

चुस्‍की है तो कट जाता है दिन ठहर जाती हैं शामें

ये चाय की चुस्‍की है तो रंगीन हो जाती है सुबह,

चुस्‍की है तो मना लिए जाते हैं रूठे भी

बन जाते हैं टूटे हुए रिश्‍ते भी ।।

 

 

दिन में जब भी आलस्‍य आये तो याद आती हैं दो चुस्कियां ।

भागदौड़ भरी जिदंगी में जीवन का रास्‍ता है दो चुस्कियां ।

तन्‍हा हो या महफिल में हमेशा साथ निभाती हैं यह दो चुस्कियां ।

साधु हो या भोगी सभी के जीवन का हिस्‍सा है यह चुस्कियां ।  

 

 

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